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Tuesday, October 30, 2018

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VAN VIHAR & SHAURYA SAMARAK  TOUR....
नमस्कार दोस्तो,
                           पिछली पोस्ट में आपने भोपाल आगमन और VAN VIHAR भ्रमण का पढ़ा होगा अगर नहीं पढ़ा है तो शुरुआती अक्षर पिछली पोस्ट में Click करके आप पढ़ सकते हैं।
                                                         VAN VIHAR में पूर्णतः आनंदित होकर हम शौर्य स्मारक आए।
            यह पहला ही मौका था जब मैं यहां आप आई वरना शौर्य स्मारक के बारे में पढ़ा सुना तो बहुत था पर यहां आने का मौका नहीं मिल पाया।       

SHAURYA SMARAK

                                                                     जब देश में सेना और सैनिकों की बात होती है तब से सबसे पहले उनकी शहादत और कुर्बानी को ही याद किया जाता है और जब शहीदों को याद करते हैं तो केवल India Gate ही याद आता है जिसे First World War के समय अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया था किंतु जब स्वतंत्र भारत का इतिहास देखते हैं तो हमें किसी भी प्रकार ऐसा स्थान नहीं मिलता है जहां सभी शहीदों को एक साथ स्थान प्राप्त हो।
                                 इसी के मद्देनजर मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा राजधानी भोपाल में शौर्य स्मारक का निर्माण कराया वाकई सराहनीय है। भोपाल के अरेरा हिल्स में लगभग 12.6 एकड़ भूमि में शौर्य स्मारक का निर्माण किया गया है, जहां देश के सभी वीरों और शहीदों को उचित व सम्मानीय स्थान दिया गया है।


                   
SOURYA-SMARAK, BHOPAL-SOURYA-SMARAK

SOURYA SMARAK


इसका उद्घाटन 14 अक्टूबर 2016 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है इसके साथ ही यह एक ऐसी कोशिश है जिसके द्वारा देश के नागरिकों को सैनिकों और शहीदों से रूबरू कराया जा सके।  शौर्य स्मारक बाहर से जितना Simple और सौम्य था अंदर से उतना ही आकर्षक और मनमोहक।
                                                           Sourya smarak के Entry  Gate से हम finally अंदर आ गए।
                                    हम यहां 15 अक्टूबर 2017 को आए थे अर्थात लगभग पहली वर्षगांठ पर, वाकई हम सही समय पर आए थे। इस समय यहां Entry Fee नहीं लग रही थी केवल कैमरे का ही charge देना था। खैर जैसे ही हम अंदर  आये शानदार गीत प्रस्तुति से ही हमारा स्वागत हो रहा था एक तो इतनी राष्ट्रीयता से परिपूर्ण परिवेश ऊपर से राष्ट्र को समर्पित गीतों की अद्भुत बेला... वाकई यह तो अविस्मरणीय हो गया।
                                     अंदर एकदम अलग ही नजारा था जहां बाहर की तरह शहर की मुख्य सड़कें थी वहीं अंदर खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण.....
                                           वाकई में शहर की लंबी चौड़ी सड़कें और गांव के लंबे लंबे पेड़ दोनों को मिश्रण देखने को भोपाल में ही मिलता है जो शहर के शोरगुल वाले माहौल में मन को एक अपार शांति प्रदान करता है।
                                          हम अब वापस शौर्य स्मारक में आ जाते हैं। शौर्य स्मारक की परिकल्पना और इसका निर्माण अद्भुत है।

                             
SOURYA-SMARAK, BHOPAL-SOURYA-SMARAK


                        मुख्य द्वार से जब हम अंदर आते हैं तो एक तरफ खुला हुआ रंग मंच (ऑडिटोरियम) बना हुआ है वहीं सामने शानदार सा गार्डन है कुछ समय रंगमंच में हो रहे गीतों का आनंद लेकर हम आगे बढ़े।


                                       


                               
SOURYA SMARAK -- The Pride of India


SOURYA SMARAK -- The Pride of India



                                   आगे तीन सेनाओं से संबंधित एक संग्रहालय का निर्माण किया गया है संग्रहालय वाकई बहुत अचंभित करने वाला था अगर आप अपने अंदर के देश प्रेम और भारतीय सेना के इतिहास को जानने के इच्छुक हैं तो आपको यहां एक बार अवश्य आना चाहिए।

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

                                 
                        संग्रहालय की प्रवेश  वीधिका में विभिन्न चित्र और तस्वीरों के माध्यम से प्राचीन से लेकर आधुनिक इतिहास का  सविस्तार चित्रण किया गया है।
                                 
                                     इसके पश्चात भारत के समस्त राष्ट्रपतियों के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है जो कि भारत की  लोकतांत्रिकता के प्रतीक स्वरूप लग रहे थे।

SOURYA SMARAK -- The Pride of India


SOURYA SMARAK -- The Pride of India



                                   इसके साथ ही यहां पर अब तक के सभी थल सेना, जल सेना और वायु सेना प्रमुखों के चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया है

SOURYA SMARAK -- The Pride of India





SOURYA SMARAK -- The Pride of India


                                                         इसके पश्चात भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन युद्धों के चित्रों को भी इसमें प्रदर्शित किया गया था। इसके पश्चात 1999 में हुए कारगिल युद्धों को भी यहाँ सम्मिलित किया गया था।

           
                                                                                               

                                                         
SOURYA SMARAK -- The Pride of India


                                                                                      इसके पश्चात यहां से आगे इसके पश्चात यहां सियाचिन ग्लेशियर का भी निर्माण किया गया था यहां बिल्कुल सियाचिन की तरह ठंड थी। साथ ही बर्फ की चादर भी हमें स्वयं की उपस्थिति सियाचिन में महसूस करा रही थी।
           
                                       
SOURYA SMARAK -- The Pride of India


                       यहां आकर यहां की ठंड को महसूस करके ही समझ आया भारतीय सैनिक कितने कष्टो को सहकर देश की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।
                     
                        और आगे बढ़ने पर हमें हमारे सैनिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य हेतु मिले पदको की बेला मिली अर्थात यहां परमवीर चक्र प्राप्त सभी सैनिकों की तस्वीरें प्रदर्शित थीं जिसे देख कर मन प्रफुल्लित तो हुआ पर मन में उनकी यादें नमी भी ला गई।
             आखिर आज इन के कारण ही तो हम इसे सुरक्षित और बेफिक्र जीवन जी रहे हैं





SOURYA SMARAK -- The Pride of India


                     

                         इसके बाद आगे बढ़ने पर हमें भारतीय थल सेना के टैंक, मिसाइल, नौसेना के युद्धपोत, विमान वाहक पोत, पनडुब्बियों के साथ वायु सेना के  युद्धक विमान आदि के मॉडल दिखाई दिए जो भारतीय सेना की सफलता को बयां कर रहे थे।

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India




SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India



SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India



SOURYA SMARAK -- The Pride of India



                       
                        इसके पश्चात हम युद्ध के रंगमंच नामक खुले मैदान में आते हैं यहां द्वार में एक दीप भी प्रचलित है यही भारतीय सैनिकों के सम्मान का सूचक है

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India


SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India

                     

                इसके पश्चात हम संग्रहालय परिधि से बाहर आ गए यहां तीनों सेनाओं के सैनिकों की याद और सम्मान में एक स्मारक बनाया गया है जिसमें डिजिटल ज्योति प्रज्ज्वलित है

                         
SOURYA SMARAK -- The Pride of India

SOURYA SMARAK -- The Pride of India




SOURYA SMARAK -- The Pride of India



SOURYA SMARAK -- The Pride of India


SOURYA SMARAK -- The Pride of India


SOURYA SMARAK -- The Pride of India



                   
                     
SOURYA SMARAK -- The Pride of India



                                                                                        इसके अलावा शहीदों को सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए बूट और बंदूक के चिन्ह भी इस परिसर में उपस्थित हैं
               

SOURYA SMARAK -- The Pride of India





             इसके बाद इसके बाद हम लाल रंग के एक स्मारक की तरफ आए जो शायद नमस्कार का प्रतिरूप था या फिर A Drop of Blood का प्रतिरूप, खैर जो भी है यह बहुत अच्छा और खूबसूरत था।


                                   
SOURYA SMARAK -- The Pride of India
                             
                           इस शौर्य स्मारक में देशभक्ति से ओतप्रोत होकर घूमते घूमते कब शाम हो गई पता ही नहीं चला।
                            वाकई शौर्य स्मारक में आकर यहां का संग्रह, शहीदों की कुर्बानी का स्मारक देख कर मन को जितनी खुशी और गर्व महसूस हुआ उसे सारे शब्दों में बयां कर पाना थोड़ा मुश्किल है, पर वाकई आज भारतीय होने पर इतना गर्व महसूस हुआ क्योंकि मैं  एेसे देश की नागरिक हूं जहां के नागरिकों की रक्षा का दायित्व एक ऐसी सेना के हाथों में है जो देश की खातिर कुछ भी करने को तत्पर हैं।
                                                                 इस प्रकार यह यात्रा यहीं समाप्त होती है परंतु यहां यात्राओं का सफर जारी रहेगा।
                                 आशा करती हूं आपको यह POST अवश्य पसंद आया होगा अगर आप किसी भी तरह का सुझाव देना चाहते हैं तो आपके सुझाव सादर आमंत्रित है


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Saturday, October 20, 2018

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 VAN VIHAR & SOURYA SAMARAK  TOUR....

   नवाबों का शहर,  प्रदेश की राजधानी, ऐसा है हमारा भोपाल.....
                                 वैसे भोपाल तो मैं कई बार आई हूं पर इस बार का सफर बहुत ही रोचक और अविस्मरणीय था। इस बार के भ्रमण ने मुझे भारतीय होने पर गर्व की जो अनुभूति कराई थी वह शायद शब्दों से बयां नहीं की जा सकती, इसलिए अपने इस यात्रा वृतांत को आप लोगों से साझा करने की तीव्र इच्छा के परिणाम स्वरुप आज मैं यह Blog लिख रही हूं।
            भोपाल जाने का प्लान कुछ अचानक ही बन गया और शायद इसलिए यह यात्रा इतनी रोचक और अविस्मरणीय हो गई।
                     यहां सुबह जाने का सोचा, वही शाम 5:00 बजे में भोपाल में थी।
                             इंदौर से भोपाल के लिए Train, Bus सभी available होती है। वैसे तो मुझे Buses की अपेक्षा Train का सफर अच्छा लगता है लेकिन INDORE TO BHOPAL के लिए Train से बेहतर Bus  होती है जहां Train 5 से 6 घंटे में लेती है वही Buses  4-5 घंटे में ही आप को भोपाल पहुंचा देती है।
                                    भोपाल में हमारे बड़े भाई नीलू रहते हैं बस उन्हीं के घर हमारे इस सफर की मंजिल थी।
                                                                                                                                       
                                              मैं INDORE से chartered Bus से निकली। INDORE में मुझे सबसे अच्छी बात यहां का public transport system लगता है जो city के अलावा other cities में भी transport provide करता है।
                                    इसमें आपको Full Security मिलती है इसमें बहुत ही Safe Traveling होती है परंतु इस बसों में आपको Other Bues की तुलना ज्यादा Pay  करना होता है परंतु जब बात safety की हो तब पैसों को नहीं देखना चाहिए
                              शाम तक में भाई के घर पहुंच गई कुछ देर आराम करने के पश्चात हम हम निकल पड़े थे सिटी को explore करने।
                        वैसे तो हम किसी special tourist place नहीं गए। BHOPAL का  BHEL वाला वाले area  और वहां की हरियाली वाली सड़के और वहाँ bike riding...मजा ही आ गया, इसमें ही हमने काफी इंजॉय किया।
                                                                                            BHOPAL का यह वाला एरिया भले ही सिटी की तरह चमक दमक नहीं रखता लेकिन यहां का प्राकृतिक वातावरण स्वयं को प्रकृति के करीब महसूस होने का एक अवसर अवश्य प्रदान करता है।
                                      इसके बाद हमने वहीं पास में स्थित restaurant में डिनर किया और फिर हम वापस घर आ गए।
                          अगले दिन मॉर्निंग का कुछ स्पेशल प्लान नहीं था और मेरा Bhopal आना भी sudden plan था इसलिए कुछ भी  plan हम नहीं कर  पाये थे। हम कुछ अच्छा प्लान करते इतने में वहां हमारे नवीन भाई भी अचानक पहुंच गए यह बहुत ज्यादा surprising था अब यही से हमारे रोचक सफर की शुरुआत होती है फिर हम तीनों decide करने में लगे कि हमें कहां जाना चाहिए।
                             फिर बिना कुछ final किए, बिना कुछ decide किए, हम निकल पड़े।
                             राजधानी की सड़कों में हमारी गाड़ी तो चल रही थी पर उससे ज्यादा रफ्तार से शायद हमारा दिमाग चल रहा था finally नीलू भैया ने VAN VIHAR चलने का सुझाव दिया, मैं और नवीन पहले वहां नहीं गए थे तो हमें बात जम गई और हमारी गाड़ी निकल पड़ी VAN VIHAR के लिए।
                           
VAN VIHAR NATIONAL PARK



                                           यह मध्य प्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है जिसमें सभी जानवरों को रखकर बसाया गया है वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी BHOPAL में एक राष्ट्रीय उद्यान है यह 'थ्री इन वन' राष्ट्रीय उद्यान है।
                                             यह अनोखा उद्यान National Park होने के साथ-साथ एक चिड़ियाघर (ZOO) तथा जंगली जानवरों का Rescue Centre (बचाव केन्द्र) भी है। 445 हैक्टेयर क्षेत्र में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में मिलने वाले जानवरों को जंगल से पकड़कर नहीं लाया गया है। यहाँ ज्यादातर वो जानवर हैं जो लावारिस, कमजोर, रोगी, घायल अथवा बूढ़े थे या फिर जंगलों से भटक-कर ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में आ गए थे तथा बाद में उन्हें पकड़कर यहाँ लाया गया। कुछ जानवर दूसरे प्राणी संग्रहालयों से भी यहाँ लाए गए हैं जबकि कुछ सर्कसों से छुड़ाकर यहाँ रखे गए हैं।
यह प्रदेश का एकमात्र 'Large zoo' यानी विशाल चिड़ियाघर है
                                                                           Finally हम VAN VIHAR पहुंच ही गए।  सबसे पहले हम लोगों ने main gate से entry ली। साथ में Entry fee counter से fee  दिये और हम लोग four wheeler में थे तो हमने उसकी slip भी  कटवाए


         Fee[Indian]     -  15  Rs
    Fee[foreigner]  -  200 Rs
    4 wheeler       -  400 Rs

                                https://travelloverankiii.blogspot.com/2018/10/van-vihar-wondering-national-park-in.html


                                   इसके बाद हम अंदर आए यहां आप cycling से भी VAN VIHAR को Explore कर सकते हैं चूँकि हम हमारे साथ गाड़ी लाए थे इसलिए हमने साइकिल की अपेक्षा स्वयं के वाहन से ही घूमना का तय किया


                              


               फिर हम लोग VAN VIHAR भ्रमण पर निकल पड़े। कुछ समय Four Wheeler से फिर कुछ समय पैदल घूमने और VAN VIHAR की खूबसूरती और प्राकृतिक वातावरण में खोने लगे।  एक तरफ घना जंगल था और दूसरी तरफ Lake बहुत ही हसीन नजारा था।
                                              वन विहार अद्भुत है। पाँच किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय उद्यान के एक तरफ पूरा पहाड़ और हराभरा मैदानी क्षेत्र है जो जंगलों तथा हरियाली से आच्छादित है। दूसरी ओर भोपाल का मशहूर तथा खूबसूरत बड़ा तालाब (ताल) है। ये संगम अपने आप में बहुत सुंदर लगता है।


                                    


            फिर हमें अब कई तरह के जानवर दिखने प्रारंभ हो गए थे

















                                                      इस वन अभ्यारण में लगभग सभी तरह के जानवरों को एकत्रित करके रखा गया है यहां हमें बहुत से कई अलग-अलग जानवरों को देखने का मौका मिला

                            

     
                            



                          



                         


                          


                                                                                   पर हम Tiger को देख नहीं पाए हमने उसे काफी Search भी किया पर हम उसे तथाकथित घने जंगल में खोजने में असमर्थ रहे।


                                      



                                                     फिर हमने वहां ढेर सारी मस्ती भी की एक Unplanned Tour को एक यादगार लम्हे में बदल दिया है यह बहुत ही रोचक और मजेदार साबित हुआ।


                                      






                             


                             इसके पश्चात हम BHOPAL में निर्मित शौर्य स्मारक पहुंचे जहां पहुंचकर ही मुझे भारतीय होने पर गर्व महसूस होने लगा।
                              इस पोस्ट में इतना ही, शौर्य स्मारक और वहाँ की यादें,अनुभव और किस्से अगले अंक में.....
                                                                                                                                 क्रमशः जारी........
                                             

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